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Mythological Story In Hindi: कौन सी स्त्री के भाग्य में पुत्र नहीं होता है — माता लक्ष्मी का प्रश्न

Mythological Story In Hindi: दोस्तों, आज हम आपको एक बहुत ही रोचक और शिक्षाप्रद पौराणिक कहानी सुनाने जा रहे हैं। यह कहानी माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु से जुड़ी है। इस कहानी में माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से तीन बहुत गहरे सवाल पूछे थे। इन सवालों के जवाब सुनकर आपको बहुत बड़ी सीख मिलेगी। पहला सवाल यह था कि कौन सी स्त्री के भाग्य में पुत्र नहीं होता है। आइए इस पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं और देखते हैं कि इससे हमें क्या सीख मिलती है।

क्षीर सागर में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु

बहुत समय पहले की बात है, क्षीर सागर में भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर लेटे हुए थे। उनके पैरों के पास माता लक्ष्मी बैठी थीं और भगवान के पैर दबा रही थीं। सब कुछ बहुत शांत और सुंदर था। समुद्र की लहरें धीरे-धीरे चल रही थीं और चारों तरफ दिव्य प्रकाश फैला हुआ था। तभी माता लक्ष्मी के मन में कुछ सवाल आए। वो बहुत दिनों से ये सवाल पूछना चाहती थीं लेकिन मौका नहीं मिला था। आज उन्होंने सोचा कि क्यों न भगवान से ये सवाल पूछ लिए जाएं। माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु की तरफ देखा और कहा — हे प्रभु, मेरे मन में तीन प्रश्न हैं जो मुझे बहुत परेशान कर रहे हैं। क्या मैं आपसे ये प्रश्न पूछ सकती हूं?

माता लक्ष्मी के तीन प्रश्न

भगवान विष्णु मुस्कुराए और बोले — हे लक्ष्मी, आप तो मेरी अर्धांगिनी हैं। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकती हैं। बताइए, आपके मन में कौन से प्रश्न हैं? माता लक्ष्मी ने विनम्रता से कहा — हे प्रभु, मेरा पहला प्रश्न यह है कि कौन सी स्त्री के भाग्य में पुत्र नहीं होता है? मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि कौन सा पुत्र अपनी माता का आदर नहीं करता? और मेरा तीसरा प्रश्न यह है कि कौन सा पति अपनी पत्नी से प्रेम नहीं करता? भगवान विष्णु ने गंभीरता से माता लक्ष्मी की तरफ देखा। उन्हें पता था कि ये सवाल सिर्फ जिज्ञासा के नहीं हैं बल्कि इनमें जीवन की बड़ी सच्चाइयां छुपी हैं। भगवान ने कहा — देवी, ये तीनों प्रश्न बहुत गहरे हैं। मैं आपको इनके उत्तर देता हूं।

पहले प्रश्न का उत्तर — कौन सी स्त्री के भाग्य में पुत्र नहीं होता

भगवान विष्णु ने कहा — हे लक्ष्मी, सुनिए ध्यान से। जो स्त्री दूसरों के घर में झगड़ा करवाती है, जो रिश्तों में फूट डालती है, जो अपने पति को उसके परिवार से दूर करने की कोशिश करती है, जो सास-ससुर का अपमान करती है और घर में कलह फैलाती है — ऐसी स्त्री के भाग्य में पुत्र नहीं होता या अगर होता भी है तो वो बहुत परेशानियां देता है। और अगर किसी स्त्री को पुत्र रत्न मिल भी जाए लेकिन वो अपने पुत्र को गलत संस्कार देती है, उसे झूठ बोलना सिखाती है, दूसरों का बुरा करना सिखाती है तो वो पुत्र भी माता के किस काम का? ऐसा पुत्र बड़ा होकर माता-पिता को ही दुख देता है। इसलिए स्त्री को चाहिए कि वो घर में शांति और प्रेम बनाए रखे, अच्छे संस्कार दे और सबका सम्मान करे। ऐसी स्त्री के घर में हमेशा खुशियां रहती हैं और उसके पुत्र भी महान बनते हैं।

दूसरे प्रश्न का उत्तर — कौन सा पुत्र माता का आदर नहीं करता

भगवान ने आगे कहा — हे देवी, अब सुनिए दूसरे प्रश्न का उत्तर। जो पुत्र अपनी पत्नी के कहने में आकर अपनी माता को भूल जाता है, जो अपनी माता से प्रेम से बात नहीं करता, जो अपनी माता की सेवा नहीं करता और उन्हें बोझ समझता है — ऐसा पुत्र कभी भी अपनी माता का सच्चा आदर नहीं करता। ऐसे पुत्र को पुत्र कहना भी पाप है। जो माता ने नौ महीने पेट में रखा, दर्द सहकर जन्म दिया, दूध पिलाया, बीमारी में रातें जागी और बड़ा करके लायक बनाया — उसी माता को अगर बुढ़ापे में छोड़ दिया जाए तो इससे बड़ा पाप और क्या हो सकता है? ऐसे पुत्र को धरती पर रहने का कोई हक नहीं है। इसलिए हर पुत्र को अपनी माता का सम्मान करना चाहिए, उनकी सेवा करनी चाहिए और उनकी खुशी को अपनी खुशी समझना चाहिए।

तीसरे प्रश्न का उत्तर — कौन सा पति अपनी पत्नी से प्रेम नहीं करता

भगवान विष्णु ने अंतिम प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा — हे लक्ष्मी, अब सुनिए तीसरे प्रश्न का उत्तर। जो पति अपनी पत्नी पर शक करता है, जो उसे मारता-पीटता है, जो उसका अपमान करता है, जो उसकी बात नहीं सुनता, जो उसे सम्मान नहीं देता और जो उसे सिर्फ एक नौकरानी की तरह समझता है — ऐसा पति कभी भी अपनी पत्नी से सच्चा प्रेम नहीं करता। पत्नी अर्धांगिनी होती है यानी आधा अंग। जो अपने आधे अंग का ही सम्मान नहीं करेगा वो कभी पूरा नहीं हो सकता। जो पति अपनी पत्नी को सम्मान देता है, उसकी बात सुनता है, उसकी राय को महत्व देता है और उसके साथ प्रेम से रहता है — ऐसे पति के घर में हमेशा लक्ष्मी का वास होता है और खुशियां बनी रहती हैं। इसलिए हर पति को अपनी पत्नी का सम्मान करना चाहिए।

माता लक्ष्मी की प्रतिक्रिया

भगवान विष्णु के इन उत्तरों को सुनकर माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने कहा — हे प्रभु, आपने मेरे सभी प्रश्नों के बहुत सुंदर उत्तर दिए। आपकी बातों से मुझे बहुत शिक्षा मिली है। ये उत्तर सिर्फ मेरे लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए हैं। हर स्त्री को, हर पुत्र को और हर पति को इन बातों को समझना चाहिए और अपने जीवन में उतारना चाहिए। भगवान विष्णु मुस्कुराए और बोले — देवी, यही तो मेरा उद्देश्य था। ये बातें सिर्फ बातें नहीं हैं बल्कि जीवन जीने के नियम हैं। जो इन्हें अपनाएगा वो हमेशा खुश रहेगा और जो इन्हें नहीं अपनाएगा वो दुख ही पाएगा।

कहानी से मिलने वाली पहली सीख — स्त्रियों के लिए

इस कहानी से हर स्त्री को यह सीख मिलती है कि घर में शांति और प्रेम बनाए रखना बहुत जरूरी है। जो स्त्री अपने घर में झगड़ा करवाती है, रिश्तों में फूट डालती है वो अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारती है। उसके बच्चे भी वैसे ही बनते हैं और बाद में उसे ही दुख देते हैं। इसलिए हर स्त्री को सास-ससुर का सम्मान करना चाहिए, पति का साथ देना चाहिए और अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने चाहिए। जो स्त्री ऐसा करती है उसके घर में हमेशा खुशियां रहती हैं और भगवान की कृपा बनी रहती है।

कहानी से मिलने वाली दूसरी सीख — पुत्रों के लिए

हर पुत्र को यह समझना चाहिए कि माता का स्थान सबसे ऊपर है। जिस माता ने आपको जन्म दिया, पाला-पोसा, बड़ा किया उसी माता को बुढ़ापे में छोड़ देना सबसे बड़ा पाप है। आज कल बहुत से लड़के शादी के बाद अपनी माता को भूल जाते हैं। वो अपनी पत्नी के कहने में आकर माता-पिता से दूर हो जाते हैं। यह बहुत गलत है। याद रखो, जो अपनी माता का सम्मान नहीं करता उसके बच्चे भी उसका सम्मान नहीं करेंगे। इसलिए अपनी माता की सेवा करो, उनका सम्मान करो और उनकी खुशी को अपनी खुशी समझो।

कहानी से मिलने वाली तीसरी सीख — पतियों के लिए

हर पति को यह समझना चाहिए कि पत्नी एक नौकरानी नहीं बल्कि अर्धांगिनी है। उसका भी सम्मान होना चाहिए, उसकी बात भी सुननी चाहिए। जो पति अपनी पत्नी को मारता-पीटता है, उसका अपमान करता है वो कभी भी घर में खुशियां नहीं ला सकता। पत्नी घर की लक्ष्मी होती है। जहां पत्नी खुश है वहां लक्ष्मी का वास होता है और जहां पत्नी दुखी है वहां से लक्ष्मी चली जाती हैं। इसलिए अपनी पत्नी का सम्मान करो, उससे प्रेम से बात करो और उसे अपने फैसलों में शामिल करो। तभी घर में सच्ची खुशी रहेगी।

Disclaimer: यह कहानी पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई घटनाएं धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं से प्रेरित हैं। यह किसी वैज्ञानिक तथ्य या ऐतिहासिक प्रमाण पर आधारित नहीं है। इसे सिर्फ आस्था, विश्वास और नैतिक शिक्षा के उद्देश्य से पढ़ें। इस कहानी का उद्देश्य किसी धर्म, लिंग या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं बल्कि अच्छे संस्कार और जीवन मूल्यों की सीख देना है। हर रिश्ते में प्रेम और सम्मान होना चाहिए, यही इस कहानी का मुख्य संदेश है।

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