Shivaji Maharaj Quotes In Hindi — दोस्तों, छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ एक महान योद्धा ही नहीं बल्कि एक महान विचारक और जीवन दर्शन के ज्ञाता भी थे। उन्होंने अपनी जिंदगी में कई ऐसी बातें कही हैं जो आज भी हमारे जीवन में उतनी ही प्रासंगिक हैं। आज हम आपको शिवाजी महाराज की एक बहुत खास बात बताने जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि चाहे कितना ही अभागा मनुष्य हो, अगर वो सुबह 3 बजे से 6 बजे के बीच यानी ब्रह्ममुहूर्त में कुछ खास काम करे तो उसे जो चाहिए वो मिलेगा। आइए जानते हैं विस्तार से कि ब्रह्ममुहूर्त में कौन से काम करने चाहिए और इससे हमें क्या फायदे मिलते हैं।
प्रश्न 1. ब्रह्ममुहूर्त क्या है और इसका समय कब होता है?
Answer: ब्रह्ममुहूर्त का मतलब है भगवान ब्रह्मा का समय। यह दिन का सबसे पवित्र और शुभ समय माना जाता है। यह समय सूरज निकलने से लगभग डेढ़ घंटे पहले शुरू होता है। आमतौर पर सुबह 3 बजे से 6 बजे के बीच का समय ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है। हालांकि यह समय मौसम और जगह के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है। इस समय वातावरण बिल्कुल शांत होता है, हवा शुद्ध होती है और प्रकृति में एक अलग ही ऊर्जा होती है। सभी धर्म ग्रंथों और आयुर्वेद में भी ब्रह्ममुहूर्त को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। इस समय उठने वाले लोग शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत मजबूत होते हैं।
प्रश्न 2. शिवाजी महाराज ने ब्रह्ममुहूर्त के बारे में क्या कहा था?
Answer: छत्रपति शिवाजी महाराज खुद ब्रह्ममुहूर्त में उठते थे और अपने सैनिकों को भी इस समय उठने की सलाह देते थे। उन्होंने कहा था कि चाहे कोई कितना भी अभागा क्यों न हो, अगर वो ब्रह्ममुहूर्त में उठकर ईश्वर की प्रार्थना करे, ध्यान करे और अपने दिन की योजना बनाए तो उसे जरूर सफलता मिलेगी। शिवाजी महाराज का मानना था कि इस समय में की गई साधना, व्यायाम और योजना बनाने से दिन भर की ऊर्जा मिलती है। उनकी सेना भी ब्रह्ममुहूर्त में उठती थी और यही कारण था कि वो हमेशा चुस्त-दुरुस्त और तैयार रहते थे। शिवाजी महाराज ने कहा था कि जो इंसान इस समय को बर्बाद करता है वो अपने भाग्य को भी बर्बाद करता है।
प्रश्न 3. ब्रह्ममुहूर्त में उठने के क्या फायदे हैं?
Answer: ब्रह्ममुहूर्त में उठने के अनगिनत फायदे हैं। पहला — इस समय हवा बिल्कुल शुद्ध होती है और ऑक्सीजन का स्तर सबसे ज्यादा होता है। जब आप इस समय गहरी सांस लेते हैं तो फेफड़ों को शुद्ध हवा मिलती है और सेहत अच्छी रहती है। दूसरा — इस समय वातावरण शांत होता है जिससे मन को शांति मिलती है और ध्यान लगाना आसान हो जाता है। तीसरा — इस समय सकारात्मक ऊर्जा सबसे ज्यादा होती है जो दिमाग को तेज बनाती है। चौथा — ब्रह्ममुहूर्त में उठने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और वजन नियंत्रण में रहता है। पांचवां — इस समय पढ़ाई करने से याददाश्त तेज होती है। छठा — ब्रह्ममुहूर्त में उठने वाले लोगों में अनुशासन और समय की पाबंदी की आदत बन जाती है। सातवां — इस समय उठने से रात को जल्दी नींद आती है और नींद गहरी आती है।
प्रश्न 4. ब्रह्ममुहूर्त में कौन-कौन से काम करने चाहिए?
Answer: ब्रह्ममुहूर्त में सबसे पहले उठकर ईश्वर को धन्यवाद दें कि उन्होंने आपको एक नया दिन दिया। फिर बिस्तर छोड़कर ताजे पानी से मुंह धोएं। इसके बाद 10-15 मिनट ध्यान या प्रार्थना करें। अपने इष्ट देव को याद करें और उनसे दिन भर के लिए शक्ति मांगें। इसके बाद हल्का योगासन या व्यायाम करें। सूर्य नमस्कार करना बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं तो इस समय जो भी पढ़ेंगे वो जल्दी याद हो जाएगा। अपने दिन की योजना बनाएं कि आज क्या-क्या काम करने हैं। अगर लिखने की आदत है तो डायरी लिखें या कुछ रचनात्मक काम करें। इस समय में किया गया कोई भी काम बाकी समय से ज्यादा असरदार होता है।
प्रश्न 5. अगर कोई पहली बार ब्रह्ममुहूर्त में उठना शुरू करे तो क्या करना चाहिए?
Answer: अगर आप पहली बार ब्रह्ममुहूर्त में उठने की कोशिश कर रहे हैं तो अचानक से बहुत जल्दी न उठें। धीरे-धीरे अपने शरीर को इस समय के लिए तैयार करें। पहले 5 बजे उठने की कोशिश करें। एक हफ्ते बाद 4:30 बजे और फिर धीरे-धीरे 3:30 या 4 बजे उठने की आदत डालें। रात को जल्दी सोएं तभी सुबह जल्दी उठ पाएंगे। कम से कम 6-7 घंटे की नींद जरूर लें। अलार्म लगाएं और अलार्म को दूर रखें ताकि उठना पड़े। उठते ही फोन न चलाएं। सबसे पहले ईश्वर को याद करें। गुनगुना पानी पिएं और हल्के व्यायाम से शुरुआत करें। शुरुआत में मुश्किल लगेगा लेकिन 21 दिन लगातार करने से यह आदत बन जाएगी। और एक बार आदत बन गई तो आप खुद महसूस करेंगे कि आपकी जिंदगी कितनी बदल गई है।
प्रश्न 6. क्या ब्रह्ममुहूर्त में उठना हर किसी के लिए जरूरी है?
Answer: ब्रह्ममुहूर्त में उठना हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है लेकिन कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। छोटे बच्चों को 8-10 घंटे की नींद चाहिए होती है इसलिए उन्हें जबरदस्ती जल्दी न उठाएं। गर्भवती महिलाओं को भी पूरी नींद लेनी चाहिए। बुजुर्ग लोग अपनी सेहत के हिसाब से उठें। अगर किसी को कोई गंभीर बीमारी है तो डॉक्टर से पूछकर ही यह आदत डालें। लेकिन स्वस्थ युवा और बड़ों के लिए ब्रह्ममुहूर्त में उठना बहुत फायदेमंद है। खासकर जो लोग सफल होना चाहते हैं, पढ़ाई कर रहे हैं, नौकरी या व्यापार में तरक्की चाहते हैं या आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं उन सबके लिए यह समय सोने का समय है। इस समय को बर्बाद मत करो, इसका सदुपयोग करो।
प्रश्न 7. शिवाजी महाराज ने और क्या-क्या सिखाया था जीवन में सफल होने के लिए?
Answer: शिवाजी महाराज ने सिर्फ ब्रह्ममुहूर्त में उठने की ही नहीं बल्कि और भी बहुत सी बातें सिखाई थीं। उन्होंने कहा था कि हमेशा अनुशासित रहो। समय की पाबंदी करो। अपने वादे को निभाओ। अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहो। माता-पिता और गुरु का सम्मान करो। औरतों का सम्मान करो, चाहे वो दुश्मन की ही क्यों न हो। गरीबों और कमजोरों की मदद करो। अपनी संस्कृति और धर्म पर गर्व करो लेकिन दूसरों के धर्म का भी सम्मान करो। कभी भी धोखा मत दो और न ही धोखा खाओ। हमेशा तैयार रहो। शिवाजी महाराज ने कहा था कि जो इंसान अनुशासित है, मेहनती है और ईमानदार है वो कभी असफल नहीं हो सकता। भले ही उसे देर लगे लेकिन सफलता जरूर मिलती है।
प्रश्न 8. आज के समय में ब्रह्ममुहूर्त की सीख कैसे अपनाएं?
Answer: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ब्रह्ममुहूर्त में उठना मुश्किल लगता है लेकिन नामुमकिन नहीं है। सबसे पहले अपनी प्राथमिकताएं तय करें। अगर आप सफल होना चाहते हैं तो कुछ त्याग करना होगा। रात को देर तक फोन चलाना, टीवी देखना या बेकार की बातों में समय बर्बाद करना छोड़ दें। रात 10-11 बजे तक सो जाएं। सुबह 4-5 बजे उठें। शुरुआत में मुश्किल होगा लेकिन धीरे-धीरे आदत बन जाएगी। जब आप ब्रह्ममुहूर्त में उठना शुरू करेंगे तो आपको खुद महसूस होगा कि आपके पास पूरे दिन के लिए कितनी ज्यादा ऊर्जा है। आपकी उत्पादकता बढ़ेगी, स्वास्थ्य अच्छा होगा और मन शांत रहेगा। शिवाजी महाराज की यह सीख आज भी उतनी ही सच है जितनी उनके समय में थी। इसे अपनाएं और अपनी जिंदगी बदलें।
Disclaimer: यह आर्टिकल ऐतिहासिक व्यक्तित्व छत्रपति शिवाजी महाराज की शिक्षाओं और प्राचीन भारतीय ज्ञान पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। हर व्यक्ति का शरीर और परिस्थिति अलग होती है। अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है तो कृपया डॉक्टर से सलाह लेकर ही अपनी दिनचर्या में बदलाव करें। ब्रह्ममुहूर्त में उठना फायदेमंद है लेकिन पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। संतुलन बनाए रखें और अपनी सेहत को प्राथमिकता दें।