Motivational Story In Hindi — दोस्तों, आज हम आपको एक बहुत ही गहरी और सीख देने वाली कहानी सुनाने जा रहे हैं। यह कहानी बताती है कि हमारे कर्मों का फल हमें जरूर मिलता है। जो हम करते हैं वही हमें वापस मिलता है। आइए जानते हैं यह प्रेरक कहानी।
एक बूढ़े पिता की कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक बूढ़ा पिता अपने बेटे के साथ रहता था। बूढ़े पिता ने अपनी पूरी जिंदगी मेहनत करके बेटे को पढ़ाया-लिखाया और बड़ा किया। बेटे की शादी हुई और घर में बहू आई। शुरुआत में सब ठीक था लेकिन धीरे-धीरे बेटा और बहू बूढ़े पिता को बोझ समझने लगे। बूढ़े पिता अब काम नहीं कर सकते थे। उनके हाथ कांपते थे और चलने में दिक्कत होती थी। खाना खाते समय कभी-कभी उनके हाथ से गिलास या प्लेट गिर जाती थी। बहू को यह सब बहुत बुरा लगता था। वो रोज बूढ़े पिता को ताने मारती और बेटे से शिकायत करती कि आपके पिता की वजह से घर गंदा हो जाता है।
बेटे का क्रूर फैसला
एक दिन बेटे ने अपनी पत्नी के कहने पर एक फैसला ले लिया। उसने अपने बूढ़े पिता को घर के बाहर एक छोटी सी कोठरी में रहने के लिए कह दिया। उसने एक पुराना लकड़ी का कटोरा दिया और कहा कि अब से आप इसी में खाना खाएंगे। बूढ़े पिता की आंखों में आंसू आ गए। वो चुपचाप उस कोठरी में रहने लगे। बेटा रोज एक बार खाना देकर चला जाता। बूढ़े पिता अकेले उस कोठरी में रहते और अपने भाग्य को कोसते। उन्हें समझ नहीं आता था कि जिस बेटे के लिए उन्होंने सब कुछ किया, वही बेटा आज उन्हें इस तरह से रख रहा है। लेकिन वो कुछ कह नहीं सकते थे क्योंकि उनके पास और कोई सहारा नहीं था।
पोते ने देखा और सीखा
बेटे का एक छोटा बेटा था यानी बूढ़े पिता का पोता। वो लड़का सब कुछ देख रहा था। वो देख रहा था कि उसके पिता अपने दादा के साथ कैसा बर्ताव कर रहे हैं। एक दिन वो लड़का बाहर खेल रहा था। उसके पिता ने देखा कि वो लकड़ी का एक कटोरा बना रहा है। पिता ने पूछा — बेटा, तुम यह क्या बना रहे हो? लड़के ने मासूमियत से जवाब दिया — पापा, मैं एक लकड़ी का कटोरा बना रहा हूं। जब आप बूढ़े हो जाओगे तो मैं आपको इसी में खाना दूंगा। और मैं आपके लिए एक छोटी सी कोठरी भी बनाऊंगा जहां आप रहोगे। पिता यह सुनकर सन्न रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हो गया।
बेटे को अपनी गलती का एहसास
बेटे को समझ आ गया कि बच्चे वही सीखते हैं जो वो अपने मां-बाप को करते हुए देखते हैं। अगर वो अपने पिता के साथ बुरा बर्ताव करेगा तो उसका बेटा भी उसके साथ वैसा ही करेगा। यह सोचकर उसकी आंखों में आंसू आ गए। वो तुरंत अपने पिता के पास गया और उनके पैर पकड़कर माफी मांगी। उसने कहा — पिताजी, मैंने बहुत बड़ी गलती की है। मैं आपको बहुत दुख दिया है। कृपया मुझे माफ कर दीजिए। बूढ़े पिता ने अपने बेटे को गले लगा लिया और कहा — बेटा, मुझे खुशी है कि तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो गया। उस दिन के बाद से बेटे ने अपने पिता को घर में वापस ले आया और उनकी अच्छे से सेवा करने लगा।
कहानी की सीख
इस कहानी से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है। पहली सीख यह है कि जो आप दूसरों के साथ करते हैं वही आपके साथ भी होगा। अगर आप अपने माता-पिता के साथ बुरा बर्ताव करेंगे तो आपके बच्चे भी आपके साथ वैसा ही करेंगे। दूसरी सीख यह है कि बच्चे देखकर सीखते हैं। वो आपकी बातें नहीं बल्कि आपके कर्म देखते हैं। आप जैसा करेंगे वैसा ही वो भी करेंगे। तीसरी सीख यह है कि माता-पिता की सेवा करना हमारा सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने हमें पाला-पोसा, बड़ा किया। अब जब वो बूढ़े हो गए हैं तो उनकी सेवा करना हमारा फर्ज है। जो लोग अपने माता-पिता की सेवा नहीं करते उनके बच्चे भी उनकी सेवा नहीं करेंगे।
कर्म का फल
इस कहानी का शीर्षक है — कर्म फल सबको मिलता है। बेटा बनकर, बेटी बनकर, दामाद बनकर, और बहू बनकर कौन आता है? जिसका तुम्हारे साथ कर्मों का लेना देना होता है। अगर आपने किसी के साथ बुरा किया है तो वो व्यक्ति आपके जीवन में किसी न किसी रूप में आएगा और आपको वही दुख देगा। अगर आपने किसी का भला किया है तो वो आपकी मदद करने के लिए आएगा। इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। बुजुर्गों की सेवा करनी चाहिए। क्योंकि आज जो हम करेंगे वही कल हमें वापस मिलेगा।
Disclaimer: यह कहानी नैतिक शिक्षा देने के उद्देश्य से लिखी गई है। इसका मकसद लोगों को अच्छे संस्कार और जीवन मूल्य सिखाना है। यह काल्पनिक कहानी है लेकिन इसमें जीवन की सच्चाई छुपी है। हर किसी को अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए। यही सबसे बड़ा धर्म है।